जिनेवा। कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया को भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं से बचाने के लिए तैयार किए जा रहे WHO महामारी समझौते (Pandemic Agreement) को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने विश्व नेताओं से इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की अपील की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 के बाद दुनिया ने महामारी से निपटने के लिए बेहतर वैश्विक सहयोग की आवश्यकता महसूस की थी, लेकिन अभी भी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
मुख्य बिंदु
• WHO महामारी समझौते को अंतिम रूप देने की मांग तेज
• कोविड-19 जैसी भविष्य की महामारी से निपटने की तैयारी पर फोकस
• वैक्सीन और दवाओं तक समान पहुंच सबसे बड़ा मुद्दा
• देशों के बीच डेटा साझा करने पर अभी भी मतभेद
• WHO ने चेतावनी दी, अगली महामारी “कब” आएगी यह सवाल है, “क्या” आएगी यह नहीं
क्या है WHO महामारी समझौता?
WHO महामारी समझौता एक वैश्विक कानूनी ढांचा है जिसका उद्देश्य भविष्य की महामारियों के दौरान देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, डेटा साझा करना, चिकित्सा संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और महामारी की तैयारी को मजबूत बनाना है। यह समझौता मई 2025 में विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा अपनाया गया था, लेकिन इसके कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों पर अभी भी बातचीत जारी है।
क्यों अटका हुआ है समझौता?
सबसे बड़ा विवाद “Pathogen Access and Benefit Sharing (PABS)” प्रणाली को लेकर है। इसके तहत यह तय किया जाना है कि यदि कोई देश किसी नए वायरस या रोगजनक की जानकारी साझा करता है, तो उसे भविष्य में विकसित होने वाली वैक्सीन, दवाओं और परीक्षण सुविधाओं तक कितनी और कैसी पहुंच मिलेगी।
विकासशील देशों का कहना है कि कोविड-19 के दौरान उन्हें वैक्सीन सबसे आखिर में मिली थी, इसलिए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं होनी चाहिए। वहीं कुछ विकसित देशों और उद्योग संगठनों का मानना है कि अत्यधिक बाध्यकारी नियम अनुसंधान और नवाचार को प्रभावित कर सकते हैं।
कोविड-19 से मिली सीख
WHO और वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कोविड-19 महामारी में दुनिया भर में करोड़ों लोगों की जान गई और वैश्विक अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान हुआ। इसी अनुभव के बाद देशों ने 2021 में महामारी समझौते की प्रक्रिया शुरू की थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में कोई नई महामारी आती है तो देशों के बीच बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया लाखों जानें बचा सकती है।
अफ्रीका में इबोला ने बढ़ाई चिंता
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। WHO का कहना है कि संक्रामक रोगों का खतरा अभी भी बना हुआ है और दुनिया को अगली स्वास्थ्य आपदा के लिए पहले से तैयार रहना होगा।
वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
हाल के वर्षों में कई देशों ने स्वास्थ्य सुरक्षा, जैव निगरानी (Bio-surveillance), वैक्सीन उत्पादन और आपातकालीन चिकित्सा प्रणालियों में निवेश बढ़ाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी से निपटना अब केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का भी हिस्सा बन चुका है।
निष्कर्ष
WHO महामारी समझौता वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि कई मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की महामारी से बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
WHO महामारी समझौता क्या है?
यह भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए बनाया जा रहा एक वैश्विक स्वास्थ्य समझौता है।
इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
महामारी की तैयारी, वैश्विक सहयोग और चिकित्सा संसाधनों तक समान पहुंच सुनिश्चित करना।
समझौता अभी तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं हुआ?
क्योंकि PABS प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
WHO ने क्या चेतावनी दी है?
WHO का कहना है कि अगली महामारी आना तय है, सवाल केवल समय का है।
क्या यह समझौता देशों की संप्रभुता को प्रभावित करेगा?
WHO के अनुसार यह समझौता राष्ट्रीय संप्रभुता को प्रभावित नहीं करता और देशों को अपनी स्वास्थ्य नीतियां तय करने का अधिकार बना रहेगा।