अंताल्या। वर्ष 2026 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन COP31 से पहले दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिफिकेशन और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। COP31 इस वर्ष नवंबर में तुर्की के अंताल्या शहर में आयोजित होगा और इसमें दुनिया के लगभग सभी देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते ऊर्जा संकट, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह सम्मेलन आने वाले दशक की ऊर्जा नीतियों को प्रभावित कर सकता है।
मुख्य बिंदु
• नवंबर 2026 में तुर्की के अंताल्या में होगा COP31 सम्मेलन
• दुनिया के ऊर्जा उपयोग में बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव
• 2035 तक वैश्विक ऊर्जा मांग का 35% बिजली से पूरा करने का लक्ष्य
• स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक परिवहन पर बढ़ता जोर
• ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन दोनों पर एक साथ फोकस
क्या है COP31?
COP31 संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन का 31वां संस्करण है। इसमें विभिन्न देशों के नेता, वैज्ञानिक, उद्योग विशेषज्ञ और पर्यावरण संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
इस वर्ष सम्मेलन 9 से 20 नवंबर 2026 तक तुर्की के अंताल्या एक्सपो सेंटर में आयोजित किया जाएगा।
2035 तक 35% इलेक्ट्रिफिकेशन का प्रस्ताव
तुर्की ने COP31 से पहले एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव रखा है, जिसके अनुसार 2035 तक वैश्विक ऊर्जा मांग का 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली के माध्यम से पूरा किया जाए। वर्तमान में यह आंकड़ा लगभग 20 प्रतिशत है।
इस योजना के तहत परिवहन, उद्योग और घरेलू ऊर्जा उपयोग में बिजली आधारित तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
कंपनियां भी कर रहीं समर्थन
हाल ही में 18 देशों के लगभग 2,000 वरिष्ठ अधिकारियों पर आधारित एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 79 प्रतिशत कंपनियां इलेक्ट्रिफिकेशन को अत्यावश्यक मानती हैं और 91 प्रतिशत का मानना है कि इससे ऊर्जा सुरक्षा बेहतर होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि उद्योग जगत अब स्वच्छ ऊर्जा को केवल पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक आवश्यकता भी मान रहा है।
ऊर्जा संकट ने बढ़ाई चिंता
मध्य पूर्व में तनाव और वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता ने कई देशों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर देखने के लिए मजबूर किया है। संयुक्त राष्ट्र के जलवायु अधिकारियों का कहना है कि नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिफिकेशन ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव का प्रभावी उपाय हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ऊर्जा सुरक्षा अब जलवायु नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
यूरोप में नवीकरणीय ऊर्जा का बढ़ता प्रभाव
हालिया ऊर्जा रिपोर्टों के अनुसार यूरोपीय संघ में 2025 के दौरान पहली बार पवन और सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली ने जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन को पीछे छोड़ दिया। इससे वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिला है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव अन्य देशों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण बन सकता है।
विकासशील देशों पर विशेष ध्यान
COP31 में विकासशील देशों को स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर भी चर्चा होगी। तुर्की और ऑस्ट्रेलिया ने इस दिशा में वैश्विक सहयोग बढ़ाने का समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विकसित और विकासशील देशों के बीच सहयोग आवश्यक होगा।
निष्कर्ष
COP31 सम्मेलन केवल पर्यावरण से जुड़ा आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा और आर्थिक भविष्य को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। इलेक्ट्रिफिकेशन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े प्रस्ताव आने वाले वर्षों में दुनिया की विकास रणनीतियों को नई दिशा दे सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
COP31 कहां आयोजित होगा?
तुर्की के अंताल्या शहर में।
COP31 कब होगा?
9 से 20 नवंबर 2026 तक।
35% इलेक्ट्रिफिकेशन लक्ष्य क्या है?
2035 तक वैश्विक ऊर्जा मांग का 35 प्रतिशत हिस्सा बिजली से पूरा करने का प्रस्ताव।
कंपनियां इस प्रस्ताव का समर्थन क्यों कर रही हैं?
क्योंकि इससे ऊर्जा सुरक्षा और लागत स्थिरता में सुधार की उम्मीद है।
COP31 का मुख्य उद्देश्य क्या होगा?
जलवायु परिवर्तन से निपटना, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना और वैश्विक सहयोग मजबूत करना।