एवियन-ले-बैंस (फ्रांस)। फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन 2026 की शुरुआत हो चुकी है, जहां दुनिया की सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), यूक्रेन संकट और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा कर रहे हैं। इस वर्ष का सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई भू-राजनीतिक चुनौतियों और व्यापारिक अनिश्चितताओं का सामना कर रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सम्मेलन के फैसले आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्य बिंदु
• फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन 2026 की शुरुआत
• व्यापार, AI, ऊर्जा और यूक्रेन प्रमुख मुद्दे
• विश्व अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखला पर विशेष चर्चा
• भारत सहित कई आमंत्रित देशों की भागीदारी
• वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर जोर
क्या है G7?
G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं। यह मंच वैश्विक आर्थिक नीतियों, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस वर्ष का सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जा रहा है।
वैश्विक व्यापार पर रहेगा फोकस
सम्मेलन में वैश्विक व्यापार असंतुलन, आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा और चीन की आर्थिक भूमिका पर विशेष चर्चा होने की उम्मीद है। यूरोपीय देशों ने हाल के वर्षों में वैश्विक बाजारों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और औद्योगिक संतुलन को लेकर चिंता व्यक्त की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापार से जुड़े निर्णय अंतरराष्ट्रीय बाजारों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
AI और नई तकनीकों पर चर्चा
इस बार AI सुरक्षा, डिजिटल नवाचार और उभरती तकनीकों को भी सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में शामिल किया गया है। विश्व के कई देश AI के उपयोग, नियमन और सुरक्षा ढांचे पर साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विश्लेषकों के अनुसार AI वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार बाजार को तेजी से प्रभावित कर रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा बनी बड़ी चिंता
हाल के महीनों में ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और मध्य पूर्व से जुड़े घटनाक्रमों ने ऊर्जा सुरक्षा को फिर से वैश्विक एजेंडे के केंद्र में ला दिया है। सम्मेलन में ऊर्जा आपूर्ति, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और दीर्घकालिक ऊर्जा स्थिरता पर चर्चा की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है।
विश्व अर्थव्यवस्था को लेकर आशावाद
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्यापक मंदी के संकेत नहीं हैं। IMF का अनुमान है कि 2026 में वैश्विक आर्थिक वृद्धि लगभग 3.1 प्रतिशत रह सकती है, हालांकि जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक सहयोग और स्थिर व्यापारिक वातावरण आर्थिक वृद्धि को समर्थन दे सकते हैं।
भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण
भारत इस वर्ष आमंत्रित देशों में शामिल है और वैश्विक व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, AI तथा विकासशील देशों के मुद्दों पर अपनी बात रख रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत के कारण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी भूमिका लगातार मजबूत हुई है।
निष्कर्ष
G7 शिखर सम्मेलन 2026 ऐसे समय में आयोजित हो रहा है जब दुनिया आर्थिक, तकनीकी और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है। व्यापार, ऊर्जा, AI और वैश्विक सहयोग से जुड़े फैसलों का असर आने वाले वर्षों में दुनिया की अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर दिखाई दे सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
G7 सम्मेलन कहां आयोजित हो रहा है?
फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में।
G7 में कितने देश शामिल हैं?
सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं।
इस बार मुख्य मुद्दे क्या हैं?
वैश्विक व्यापार, AI, ऊर्जा सुरक्षा और यूक्रेन संकट।
क्या भारत सम्मेलन में शामिल है?
हाँ, भारत आमंत्रित देशों में शामिल है।
IMF ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर क्या कहा है?
IMF के अनुसार फिलहाल वैश्विक मंदी के संकेत नहीं हैं, हालांकि जोखिम बने हुए हैं।