जिनेवा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष अगस्त तक एल नीनो (El Niño) विकसित होने की संभावना 80 प्रतिशत तक पहुंच गई है और इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एल नीनो मजबूत रूप में विकसित होता है तो दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़, हीटवेव और कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
जलवायु वैज्ञानिकों का मानना है कि पहले से बढ़ते वैश्विक तापमान के बीच एल नीनो का प्रभाव और अधिक गंभीर हो सकता है।
मुख्य बिंदु
• अगस्त 2026 तक एल नीनो बनने की 80% संभावना
• नवंबर तक बने रहने की 90% संभावना
• एशिया में कृषि और खाद्य उत्पादन प्रभावित हो सकता है
• कई देशों में सूखा और अत्यधिक वर्षा की आशंका
• जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ सकता है प्रभाव
क्या है एल नीनो?
एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी भाग में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। यह वैश्विक मौसम प्रणाली को प्रभावित करता है और दुनिया भर में वर्षा तथा तापमान के पैटर्न को बदल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार एल नीनो के दौरान कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश होती है, जबकि कई क्षेत्रों में गंभीर सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
कृषि क्षेत्र पर सबसे बड़ा खतरा
जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि एशिया और अफ्रीका के कई देशों में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। विशेष रूप से चावल, गेहूं, मक्का और अन्य खाद्यान्न फसलों पर इसका असर पड़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार एशिया में फसल उत्पादन घटने से खाद्य सुरक्षा और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
चरम मौसम घटनाओं में वृद्धि
एल नीनो के प्रभाव से कई देशों में हीटवेव, जंगलों में आग, सूखा और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से ही चरम मौसम घटनाएं अधिक तीव्र हो रही हैं और एल नीनो इस स्थिति को और गंभीर बना सकता है।
वैश्विक तापमान पर असर
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार पृथ्वी का औसत तापमान पहले ही औद्योगिक युग से लगभग 1.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। ऐसे में एल नीनो वैश्विक तापमान को और बढ़ा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कई देशों को रिकॉर्ड गर्मी का सामना करना पड़ सकता है।
भारत और एशिया पर प्रभाव
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो का असर भारतीय मानसून पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम स्थिति आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी, लेकिन वैज्ञानिक लगातार इसकी निगरानी कर रहे हैं।
कृषि आधारित अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के लिए यह विशेष चिंता का विषय माना जा रहा है।
सरकारें और एजेंसियां हुईं सतर्क
दुनिया के कई देशों ने संभावित जलवायु जोखिमों को देखते हुए आपदा प्रबंधन और खाद्य सुरक्षा योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते तैयारी करने से संभावित नुकसान को कम किया जा सकता है।
निष्कर्ष
एल नीनो की संभावित वापसी को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि यह प्रणाली मजबूत होती है तो इसका असर कृषि, खाद्य सुरक्षा, जल संसाधनों और वैश्विक अर्थव्यवस्था तक दिखाई दे सकता है। आने वाले महीनों में मौसम एजेंसियों की निगरानी और सरकारी तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण होंगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एल नीनो क्या है?
प्रशांत महासागर में समुद्री तापमान बढ़ने से बनने वाली जलवायु घटना, जो वैश्विक मौसम को प्रभावित करती है।
एल नीनो बनने की संभावना कितनी है?
अगस्त 2026 तक 80 प्रतिशत संभावना बताई गई है।
इसका सबसे बड़ा असर किस पर पड़ सकता है?
कृषि, खाद्य उत्पादन और मौसम पैटर्न पर।
क्या भारत प्रभावित हो सकता है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय मानसून और कृषि क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।
WMO ने क्या चेतावनी दी है?
नवंबर तक एल नीनो के बने रहने की 90 प्रतिशत संभावना जताई गई है।